PLi
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| संजीव शाकिर |
Work On Time का कमाल है,
समूचे हिंदुस्तान में बवाल है।
PLI के भंवर में कौन डूबेगा?
यही तो एक पुख़्ता सवाल है।
साहिब-ए-मसनद पूंजीवाद को बढ़ाएंगे,
सरकारी कर्मचारियों के हक़ मारे जाएंगे।
पब्लिक है, सब जानती है-फक़त गीत नहीं है,
सारा हिसाब लेगी, मालिक जो भी लुटाएंगे।
ज़रा देखो कैसे चली उसने चाल है?
आज PLI के लिए जो मालामाल है,
कल दिवाली में इंसेंटिव के नाम पर,
प्रबंधन, ख़ुद को कहता था कंगाल है।
PLI के चाबुक से ख़ूब ज़ख़्म ढाएंगे,
चोट को कुरेद कर मरहम लगाएंगे।
कमाई होगी जो तुम्हारे ख़ून-पसीने से,
महफ़िलों में उसे अपने नाम से गिनाएंगे।
Late Sitting के चक्कर में कमर टूट जाती है,
बुढ़ापा संवारने में जवानी छूट जाती है।
जब-जब इतवार को खुलता है दफ्तर,
साहब को मनाने में बच्ची रूठ जाती है।
बैंक का Balance Sheet कितना भी सजा लो,
आठ दिन के PLI से खुशियां मना लो।
ज़िंदगी के अध्याय में मगर ये सबक रहे,
अपने सारे रिश्तों को Dormancy से बचा लो।
ढलता सूरज, ढलती शाम जाने कब देखा था,
मुद्दतें गुज़र गईं जब यारों के साथ बैठा था।
फ़रामोश हुए रोज़ी-रोटी की कमाई में,
सीने में जिंदा दिल तन्हा ही रहता था।
अब हर जगह यही सवाल पूछे जाएंगे,
किस-किस का मुंह साहब बंद कराएंगें।
10 से 10 की नौकरी के दिन चले गए,
अब 10 से 5 करके उनको हम दिखायेंगे।
शहीदों की सरज़मीं से ललकारता हूँ मैं,
जागो सोए सिंहों—तुम्हें पुकारता हूँ मैं।
“साथियो, साथ दो” के गगनभेदी नाद से,
क्षण-क्षण, कण-कण दहाड़ता हूँ मैं।
ना आएँगे श्री कृष्ण, ना कोई गीता सुनाएगा,
रणभूमि में लड़ेगा जो, इतिहास वही बनाएगा।
“आवाज़ दो—हम एक हैं” के गूंजते रणघोष से,
इस ज़ुल्म का किला एक दिन ढह जाएगा।
संजीव शाकिर
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Shaandaar.
ReplyDeleteBahut khub... har banker ki aawaj... 👏
ReplyDelete👍
ReplyDeleteVery well penned.
ReplyDelete🙏
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