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Showing posts from March, 2026

PLi

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संजीव शाकिर Work On Time का कमाल है, समूचे हिंदुस्तान में बवाल है। PLI के भंवर में कौन डूबेगा? यही तो एक पुख़्ता सवाल है। साहिब-ए-मसनद  पूंजीवाद को बढ़ाएंगे, सरकारी कर्मचारियों के हक़  मारे जाएंगे। पब्लिक है, सब जानती है-फक़त गीत नहीं है, सारा हिसाब लेगी, मालिक जो भी लुटाएंगे। ज़रा देखो कैसे चली  उसने चाल है? आज PLI के लिए जो  मालामाल है, कल दिवाली में इंसेंटिव के नाम पर, प्रबंधन, ख़ुद को  कहता था कंगाल है। PLI के चाबुक से ख़ूब ज़ख़्म ढाएंगे, चोट को कुरेद कर मरहम लगाएंगे।  कमाई होगी जो तुम्हारे ख़ून-पसीने से, महफ़िलों में उसे अपने नाम से गिनाएंगे। Late Sitting के चक्कर में कमर टूट जाती है,   बुढ़ापा संवारने में जवानी छूट जाती है।   जब-जब इतवार को खुलता है दफ्तर,   साहब को मनाने में बच्ची रूठ जाती है। बैंक का Balance Sheet कितना भी सजा लो,   आठ दिन के PLI से खुशियां मना लो।   ज़िंदगी के अध्याय में मगर ये सबक रहे,   अपने सारे रिश्तों को Dormancy से बचा लो। ढलता सूरज, ढलती शाम जाने कब देखा था,...

नाRi

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संजीव शाकिर सूरज के जगने से पहले उसकी आंखे खुल जाती हैं, क़दम पड़े जो धरा पर उसके घड़ी की सुइयाँ हिल जाती हैं। एहसास कराती हर टिक-टिक पर आख़िर, कैसी ज़िम्मेदारी है, चूल्हे की आग में हर दिन तपना उल्लास नहीं, लाचारी है। घर की चौखट पर घूँघट काढ़े अपनों की राह वो तकती है, है दर्द बहुत घुटनों में उसके पर कभी नहीं वह थकती है। सबने तो देखा है मोह तेरा तेरा रोष कहाँ किसने देखा, रावण भी थर-थर काँपेगा यदि खींचे स्वयं तू, लक्ष्मण रेखा। पूजा थाली को ढाल बनाकर आरती की लौ मशाल बना, मजबूरी की ज़ंजीरें पिघलाकर लक्ष्मीबाई की तलवार बना। पुरुष का पौरुष, भ्रम है केवल ताक़त जिसको वह कहता है, स्वयं संरक्षण पाने की ख़ातिर तेरी कोख में ख़ुद वो रहता है। तू नज़र झुकाए बैठी है जब है प्रथम अधिकार तेरा, अरे आंख मिला के कह दे जग से पूरा है, यह संसार तेरा। होगा माई का लाल कोई वह लाल भी है एक लाल तेरा, बाँध ले पूरी दुनिया आँचल में ऐसा अद्भुत किरदार तेरा। संजीव शाकिर ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ Instagram   Sanjeev_Shaakir YouTube   Click Here  💕 Facebook Sanjeev Shaakir ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~...