घाव
संजीव शाकिर मैं घाव हूं दिल का, छुओगे तो भरूंगा नहीं। ये नीम हकीम ख़तरा-ए-जान, से डरूंगा नहीं। क़त्ल करना हो मुझे, तो एक अश्क़ बहा देना। वरना लाख बददुआओं से भी, मैं मरूंगा नहीं।। इस जलती लौ के चारों ओर चल घूम ले अभी। फेरे के वक़्त तेरे, ऐ ज़ालिमा, यूँ रहूँगा नहीं।। पन्ने पलटे तो ग़ज़लों ने तेरी याद ताज़ा की। तेरी पीठ पे लिखा मतला महफ़िल में पढूंगा नहीं।। तू ठहर, मै चलता हूं, कि किसी की नज़र ना पड़े। अब किसी ने कुछ कहा, तो क़सम से सहूंगा नहीं।। संजीव शाकिर ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ Instagram Sanjeev_Shaakir YouTube Click Here 💕 Facebook Sanjeev Shaakir ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~