हाल-चाल ?

परवाह कब थी उसे, जो मेरा हाल-चाल पूछती
और कुछ नहीं तो, सीने में जलता मशाल पूछती

मेरी फ़िक्रमंदी से तो, उसकी बेफिक्री बेहतर
जो फुर्सत होती उसे तो, बेशक बेमिसाल पूछती

और सुनाइए कैसे हैं? खैरियत! सब पूछते हैं
ये गवारा नहीं था तो,कम से कम इंतकाल पूछती

ख़ुमारी में भी शुमार था,यूं बेहिसाब जिक्र उसका
वो भूल गई होगी,वरना,ब-ख़ुदा कमाल पूछती

यूं तो नहीं मनाती, "दिवाली" बारूद जलाकर वो
हां मगर,गोरे गाल पर लगे,लाल गुलाल पूछती


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संजीव शाकिर
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संजीव शाकिर




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