हूं ऊ ऊ ऊ उ उ उ म म म म म.......



वो कहती है,
हूं ऊ ऊ ऊ उ उ उ म म म म म........🤔🤫🤭

दुनिया की चाहे लगी हो वाट
हर शय की अपनी खड़ी हो खाट
तकलीफों का अंबार है तो क्या ?
खुशियों का त्योहार है तो क्या ?
चाहे कुछ भी पूछो आप
उसका है बस एक जवाब.....

वो कहती है,
हूं ऊ ऊ ऊ उ उ उ म म म म म........🤔🤫🤭

चांद सितारे होंगे अंबर में
जब लेना एक न देना दो है
नन्हीं नन्हीं खुशियों में जीना
मुतमइन है वो, मयस्सर जो है
क्या था कल में, कल में है क्या ?
सीखो उससे, जीना है क्या ?
कल की फिकरों को, कल देखेंगे
उसको तो बस, जीना है आज
चाहे कुछ भी, पूछो आप
उसका है, बस एक जवाब.....

वो कहती है,
हूं ऊ ऊ ऊ उ उ उ म म म म म........🤔🤫🤭

बड़े-बड़े मसले सुलझाती है
बिन कुछ बोले, बिन मुंह खोले
वो तितली जैसी इतराती है
सपनों के, रंग-बिरंगे पर खोलें
उसकी दुनिया में जो भी जाए
उसी का बस होकर रह जाए
संग मुस्काती हंसती गाती, पर
चले मर्जी उसकी, उसी का ठाठ
चाहे कुछ भी पूछो आप
उसका है बस एक जवाब.....

वो कहती है,
हूं ऊ ऊ ऊ उ उ उ म म म म म........🤔🤫🤭

बिन मद्यसार की मदिरा है वो
वो है पैमाना सदाक़त की
साथ हो फिर सोगवारी कैसी
नज़ीर है वो तो बरकत की
होली की रंगत है वो
दीपावली की दीप है
चिड़ियों की कूजन है वो
छठ की मधुरम गीत है
है सख्त बड़ी और सहज भी
कांटो बिच जैसे फूल गुलाब
चाहे कुछ भी पूछो आप
उसका है बस एक जवाब.....

वो कहती है,
हूं ऊ ऊ ऊ उ उ उ म म म म म.......🤔🤫🤭

वो उष्णकाल की, कूकती कोयल
चुलबुल मन की, जैसे गौरैय्या 
एक बार जो, हाथ थाम ले
पार लगा दे, डूबती नैय्या
जड़- अंतस को, शीतल करके
नदियों के कल- कल सी बहती 
विचरे हिरणी बन, दिल जंगल में
जो नयन लड़े तो मौन सी रहती
उसके अक्षर हैं शब्द बराबर
पढ़ना चाहो तो खुली किताब
चाहे कुछ भी पूछो आप
उसका है बस एक जवाब.....

वो कहती है,
हूं ऊ ऊ ऊ उ उ उ म म म म म.......🤔🤫🤭

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संजीव शाकिर
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