सैलरी
सैलरी 27 को जब आंख खुली मोबाइल में ही सैलरी मिली। ग्रॉस था मेरा लाख के पार मेसेज में आए चंद हजार।। खुश हो लूं या दुख मैं तोलूँ कैसे चलेगा इसमें संसार। चेहरे के इसी भाव को पढ़कर श्रीमती ने किया तंज प्रहार।। मैडम बोली प्रश्न चिन्हों में आ गया है क्या पगार ? कितना आया कितना आया जरा बताओ हमको भी यार।। देखूं- देखूं, मैं भी तो देखूं आया कितना है अबकी बार। अच्छा छोड़ो रहने भी दो दे दो मुझको बस बीस हजार।। ये राशन, तेल, दूध का कोटा स्कूल फीस और बिल ये मोटा। चुकता कर दूंगी एक बार में ताने- वाने, मुझसे नहीं होता।। और शाम को जानू जल्दी आना खायेंगे आज हम बाहर खाना। सज धज के निकलूंगी जब मैं आँखें फाड़ देखेगा ज़माना।। तभी अचानक बाई आई बोली कुछ दे दो हमें कमाई। रामू काका ने कुछ ऐसे देखा सबका हो जाए फिर मैं लेता।। मैने फिर से जब फोन उठाया टन- टन करके मैसेज आया। आंख खुली की खुली रही हाय! क्रेडिट कार्ड का इतना बकाया।। मैडम बोली उचको नहीं ज्यादा बिल आया है अबकी आधा। मालूम नहीं कुछ तुम्हे यहां हर तरफ बचाया, बचता जहां।। पंखे को बोली बिजली से डरो अपना बिल या खुद ही भरो। एसी की तुमको बात बताऊं बिन ऑन किए...